Текст песни
हे राजपुत्र, चम्पक-वर्णी, स्वर्ण-भूषित गात
मैं कुटीर की सूखी तरुणी, तप्त भूमि सा पात
तुम्हें निहारूँ दूर से, जैसे चकोर चंदा क
मेरी निर्धन सांसें रटतीं, नाम बस तुम्हारा ह
न मखमल
न मखमल
न मखमल
हे राजपुत्र, चम्पक-वर्णी, स्वर्ण-भूषित गात
मैं कुटीर की सूखी तरुणी, तप्त भूमि सा पात
तुम्हें निहारूँ दूर से, जैसे चकोर चंदा क
मेरी निर्धन सांसें रटतीं, नाम बस तुम्हारा ह
न मखमल
न मखमल
न मखमल
न मखमल
न मखमल